देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखण्ड सरकार द्वारा संचालित मुख्यमंत्री श्रमिक स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (CMSSY) दूसरे राज्यों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन रही है। इसी क्रम में शनिवार को उत्तर प्रदेश के अपर श्रमायुक्त जुनैद अहमद के नेतृत्व में पहुंची अधिकारियों की टीम ने देहरादून में योजना की कार्यप्रणाली और क्रियान्वयन व्यवस्था का अध्ययन किया। टीम ने विशेष रूप से निर्माण श्रमिकों को उनके कार्यस्थल पर ही स्वास्थ्य जांच की सुविधा उपलब्ध कराने वाले उत्तराखण्ड मॉडल की जानकारी प्राप्त की।
कार्यस्थल पर ही 44 प्रकार की निःशुल्क जांच
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 23 जुलाई 2026 को मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में श्रमिक कल्याण योजनाओं का शुभारंभ करते हुए दो मोबाइल मेडिकल वैन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। इस योजना के तहत निर्माण श्रमिकों को उनके कार्यस्थल और आवास स्थल पर ही एक्स-रे, ईसीजी सहित 44 प्रकार की निःशुल्क स्वास्थ्य जांच और विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श की सुविधा दी जा रही है।
मुख्यमंत्री ने योजना की समीक्षा के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि जांच में किसी बीमारी की पहचान होने पर संबंधित श्रमिक के समुचित उपचार की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए। साथ ही दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले पात्र श्रमिकों तक स्वास्थ्य सेवाओं और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने पर जोर दिया गया।
बिना अतिरिक्त पूंजीगत निवेश के 60 हजार श्रमिकों की जांच
उत्तर प्रदेश से आए अधिकारियों के साथ आयोजित बैठक में उत्तराखण्ड के श्रमायुक्त एवं उत्तराखण्ड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के सचिव प्रकाश चन्द्र दुम्का ने योजना की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि योजना के माध्यम से पंजीकृत निर्माण श्रमिकों और उनके पात्र आश्रितों को स्वास्थ्य जांच की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। इसके साथ ही गंभीर बीमारियों की समय रहते पहचान, चिकित्सकीय परामर्श और जरूरत पड़ने पर उच्च चिकित्सा संस्थानों में रेफरल की व्यवस्था भी की गई है।
उन्होंने बताया कि राज्य में उपलब्ध संसाधनों और व्यवस्थाओं के प्रभावी उपयोग से अब तक लगभग 60 हजार पंजीकृत निर्माण श्रमिकों को स्वास्थ्य जांच की सुविधा प्रदान की जा चुकी है। तकनीकी नवाचार, बेहतर प्रबंधन और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय के माध्यम से योजना का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश में भी लागू करने की संभावनाओं पर चर्चा
उत्तर प्रदेश की टीम ने योजना की तकनीकी संरचना, श्रमिकों के पंजीकरण एवं सत्यापन, स्वास्थ्य जांच शिविरों के संचालन, जांच रिपोर्ट उपलब्ध कराने और गंभीर बीमारियों की पहचान के बाद उपचार के लिए रेफरल व्यवस्था की जानकारी ली। बैठक में उत्तर प्रदेश में भी इसी तरह की व्यवस्था विकसित करने की संभावनाओं पर चर्चा की गई।
मुख्यमंत्री श्रमिक स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के क्रियान्वयन मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली है। उत्तराखण्ड की यह पहल श्रमिकों को उनके कार्यस्थल पर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ ही बीमारियों की समय रहते पहचान और उपचार से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
उत्तर प्रदेश की टीम का यह अध्ययन भ्रमण दोनों राज्यों के बीच श्रमिक कल्याण के क्षेत्र में अनुभवों के आदान-प्रदान और बेहतर कार्यप्रणालियों को अपनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
इस अवसर पर उत्तराखण्ड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के उप श्रमायुक्त विपिन कुमार तथा वरिष्ठ तकनीकी विशेषज्ञ दुर्गा चमोली भी उपस्थित रहीं।

