‘नेशन फर्स्ट’ की भावना के साथ बड़े सपने देखें युवा : राज्यपाल गुरमीत सिंह

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नैनीताल, 18 जून। उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने गुरुवार को सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह में प्रतिभाग करते हुए विद्यार्थियों से राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए बड़े सपने देखने और नवाचार को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विकसित भारत-2047 के निर्माण में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है और ‘नेशन फर्स्ट’ की भावना ही राष्ट्र निर्माण का मूल आधार है।

राज्यपाल ने उपाधि प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय के इतिहास का यह स्वर्णिम अवसर है। उन्होंने विद्यार्थियों को संस्थान के ‘फाउंडेशन पिलर्स’ बताते हुए कहा कि उनके कार्य और उपलब्धियां आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेंगी।

उन्होंने कहा कि अल्मोड़ा की धरती सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और वैचारिक चेतना का केंद्र रही है। कसार देवी, गोलू देवता, बाबा नीब करौरी और मां नंदा-सुनंदा की पावन परंपरा से समृद्ध यह क्षेत्र सदैव राष्ट्र को नई दिशा देता रहा है। राज्यपाल ने महान जननायक सोबन सिंह जीना को नमन करते हुए कहा कि उनके नाम पर स्थापित विश्वविद्यालय शिक्षा, शोध और नवाचार के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू रहा है।

राज्यपाल ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप विश्वविद्यालय द्वारा कौशल विकास, उद्यमिता, शोध और नवाचार को बढ़ावा देने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि शोध कार्य केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित न रहकर समाज की समस्याओं के समाधान का माध्यम बनने चाहिए। पर्वतीय कृषि, जड़ी-बूटी, जल संरक्षण और स्थानीय चुनौतियों के समाधान के लिए शोध को उपयोगी बनाने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश की बेटियां हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं और दीक्षांत समारोहों में बड़ी संख्या में छात्राओं का सम्मानित होना उत्तराखंड के लिए गर्व का विषय है। विकसित भारत के निर्माण में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी।

युवाओं को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि उन्हें रोजगार मांगने वाला नहीं बल्कि रोजगार देने वाला उद्यमी बनना होगा। जैविक कृषि, जड़ी-बूटी, पर्यटन और स्टार्टअप के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं, जिनका लाभ उठाकर पलायन जैसी समस्या का समाधान किया जा सकता है।

राज्यपाल ने पर्यावरण संरक्षण को उत्तराखंड का प्राकृतिक और आध्यात्मिक दायित्व बताते हुए हिमालय, नदियों और वनों के संरक्षण का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रकृति और प्रगति के बीच संतुलन स्थापित कर उत्तराखंड सतत विकास का आदर्श मॉडल प्रस्तुत कर सकता है।

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