देहरादून, 1 अगस्त। यूकॉस्ट, डीआईटी यूनिवर्सिटी एवं दिव्य हिमगिरि के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित छठे टॉपर्स कॉन्क्लेव में शनिवार को देहरादून के आईसीएसई एवं सीबीएसई बोर्ड के 31 प्रमुख स्कूलों के मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में उत्तराखंड शासन के सचिव एवं आईएएस अधिकारी डॉ. पंकज कुमार पांडेय ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करते हुए 31 स्कूलों के प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले 306 विद्यार्थियों को गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल तथा प्रशस्ति पत्र प्रदान किए। इस अवसर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 31 स्कूलों को भी ‘बेस्ट स्कूल अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया।
देहरादून स्थित आईआरडीटी ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. पंकज कुमार पांडेय ने कहा कि “सफलताएं प्राप्त करने से भी कठिन उन सफलताओं के शिखर पर टिके रहना है।” उन्होंने कहा कि बोर्ड परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन जीवन की शुरुआत है और विद्यार्थियों को आगे भी निरंतर सीखने और स्वयं को बेहतर बनाने की दिशा में प्रयासरत रहना चाहिए।
उन्होंने कहा कि एक अभिभावक होने के नाते वे बच्चों की सफलता से जुड़ी भावनाओं को भली-भांति समझते हैं। उन्होंने कहा कि जब उनके पुत्र को स्कूल टॉपर बनने का सम्मान मिला था, तब उन्हें जिस गर्व का अनुभव हुआ था, वही खुशी आज यहां उपस्थित अभिभावकों के चेहरों पर दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि किसी भी विद्यार्थी की सफलता के पीछे शिक्षकों के साथ-साथ अभिभावकों का भी महत्वपूर्ण योगदान होता है।
विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सफलता मिलने के बाद विनम्रता बनाए रखना और अपने मित्रों का साथ कभी न छोड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्कूल के दिनों में बनने वाली मित्रता जीवनभर साथ रहती है और आज के समय में अकेलेपन की समस्या तेजी से बढ़ रही है। इसलिए रिश्तों और मित्रता को भी उतना ही महत्व देना चाहिए जितना सफलता को।
डॉ. पांडेय ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस दौर में वही लोग आगे बढ़ेंगे जिनके पास मौलिक सोच और नवाचार की क्षमता होगी। उन्होंने विद्यार्थियों से तकनीक का सकारात्मक उपयोग करने और आजीवन सीखने की आदत विकसित करने का आह्वान किया।
डीआईटी यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. जी. रघुराम ने कहा कि आज शिक्षा के अवसर पहले की तुलना में कहीं अधिक व्यापक हैं। उन्होंने कहा कि अब यह महत्वपूर्ण नहीं है कि शिक्षा किस संस्थान से प्राप्त की गई है, बल्कि यह मायने रखता है कि विद्यार्थी ने कितनी गहराई से ज्ञान अर्जित किया है और उसे जीवन में कैसे उपयोग करता है।
आईआईपी के निदेशक डॉ. हरेंद्र सिंह बिष्ट ने कविता के माध्यम से विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत-2047 के संकल्प को साकार करने में आज के मेधावी छात्र-छात्राओं की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने कहा कि यही विद्यार्थी भविष्य में देश के नेतृत्व और राष्ट्र निर्माण की जिम्मेदारी संभालेंगे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए यूकॉस्ट के महानिदेशक प्रो. (डॉ.) दुर्गेश पंत ने कहा कि देहरादून के विद्यार्थियों का सौभाग्य है कि यहां देश के 30 से अधिक प्रमुख वैज्ञानिक संस्थान स्थित हैं। उन्होंने बताया कि अगले वर्ष तक देश की पांचवीं साइंस सिटी भी देहरादून में तैयार हो जाएगी। उन्होंने विद्यार्थियों से वैज्ञानिक संस्थानों का भ्रमण कर नई तकनीकों और अनुसंधान से जुड़ने का आह्वान किया।
इस अवसर पर प्रिंसिपल्स प्रोग्रेसिव स्कूल्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. प्रेम कश्यप तथा दून इंटरनेशनल स्कूल के चेयरमैन डॉ. डी.एस. मान ने भी विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम संयोजक डॉ. कुँवर राज अस्थाना ने स्वागत भाषण देते हुए कॉन्क्लेव की रूपरेखा और भविष्य की योजनाओं की जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान अतिथियों ने चयनित 31 स्कूलों के परीक्षा परिणामों पर आधारित ‘टॉपर्स कॉन्क्लेव स्मारिका’ का विमोचन भी किया।
कार्यक्रम का संचालन यूकॉस्ट के वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. ओ.पी. नौटियाल ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन यूकॉस्ट के संयुक्त निदेशक डॉ. डी.पी. उनियाल ने प्रस्तुत किया। इस अवसर पर विभिन्न विद्यालयों के प्रधानाचार्य, प्रबंधन प्रतिनिधि, अभिभावक एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
इस वर्ष टॉपर्स कॉन्क्लेव में कक्षा 10वीं एवं 12वीं के मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित करने के साथ ही 31 विद्यालयों को उनके उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन के लिए ‘बेस्ट स्कूल अवॉर्ड’ प्रदान किया गया। कार्यक्रम ने शिक्षा, प्रतिभा और उत्कृष्टता को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया।