नई दिल्ली, 15 जुलाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में देश के बुनियादी ढांचे, परिवहन, कृषि और विनिर्माण क्षेत्र को नई गति देने वाले कई महत्वपूर्ण फैसलों को मंजूरी दी गई। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि कैबिनेट ने कुल 2,19,353 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं को स्वीकृति दी है। इनमें वाराणसी में दो बड़े एलिवेटेड कॉरिडोर, सेमीकंडक्टर मिशन 2.0, मोबाइल फोन निर्माण योजना, यूरिया निवेश नीति तथा रेलवे परियोजनाएं प्रमुख हैं।
सबसे महत्वपूर्ण निर्णयों में उत्तर प्रदेश के वाराणसी में राष्ट्रीय राजमार्ग-19 और वाराणसी रिंग रोड के बीच 46.039 किलोमीटर लंबे छह लेन के ग्रीनफील्ड एलिवेटेड कॉरिडोर को मंजूरी दी गई है। लगभग 14,447.64 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना में एलिवेटेड मार्ग, केबल-स्टे ब्रिज, फुट ओवर ब्रिज, लूप, रैंप, लिंक रोड और सर्विस रोड का निर्माण किया जाएगा। परियोजना के पूरा होने से वाराणसी शहर में यातायात का दबाव कम होगा और गंगा किनारे निर्बाध कनेक्टिविटी उपलब्ध होगी।
इसके साथ ही वरुणा नदी के किनारे NH-31 और वाराणसी रिंग रोड को जोड़ने वाले 43.218 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड कॉरिडोर को भी मंजूरी दी गई है। करीब 10,998.32 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना में 6 और 4 लेन का एलिवेटेड मार्ग, फ्लाईओवर, रैंप और सर्विस रोड विकसित किए जाएंगे। इससे शहर में ट्रैफिक जाम की समस्या कम होने और आवागमन आसान होने की उम्मीद है।
कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय निवेश नीति-2026 को मंजूरी दी है, जिसका उद्देश्य घरेलू यूरिया उत्पादन बढ़ाकर किसानों को खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
रेल अवसंरचना के विस्तार के तहत पारादीप-हरिदासपुर रेल लाइन के दोहरीकरण के लिए 2,542 करोड़ रुपये तथा डांगोआपोसी-राजखरसावां रेल मार्ग की चौथी लाइन के निर्माण के लिए 1,365 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। इन परियोजनाओं से माल परिवहन और औद्योगिक गतिविधियों को गति मिलेगी।
तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में सरकार ने ‘सेमीकंडक्टर 2.0’ योजना के लिए 1,27,500 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी है। वहीं, भारत में मोबाइल फोन निर्माण को बढ़ावा देने के लिए मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग योजना (एमपीएमएस) के तहत 62,500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
केंद्र सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं से देश में आधुनिक बुनियादी ढांचे का विस्तार होगा, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, औद्योगिक निवेश को बढ़ावा मिलेगा और भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति होगी।