उत्तराखंड कैबिनेट के बड़े फैसले, पढे पूरी खबर

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देहरादून | 11 फरवरी 2026 | उत्तराखंड मंत्रिमंडल की बैठक में कई महत्वपूर्ण जनहितकारी निर्णयों पर मुहर लगी। ड्रग फ्री अभियान को नया ढांचा देने, वन विभाग के दैनिक श्रमिकों को न्यूनतम वेतन प्रदान करने, ईएसआई चिकित्सा सेवा का विस्तार करने तथा विभिन्न विधायी संशोधनों से जुड़े प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई।


ड्रग फ्री मुहिम को मिलेगा स्वतंत्र ढांचा

राज्य में वर्ष 2022 में गठित एंटी नारकोटिक्स टॉस्क फोर्स (ANTF) अब प्रतिनियुक्ति व्यवस्था से आगे बढ़कर अपने स्वतंत्र ढांचे में कार्य करेगी। राज्य मुख्यालय स्तर पर पहली बार 22 पदों का सृजन किया गया है।

इनमें 1 पुलिस उपाधीक्षक, 2 ड्रग निरीक्षक, 1 निरीक्षक, 2 उपनिरीक्षक, 4 मुख्य आरक्षी, 8 आरक्षी तथा 2 आरक्षी चालक शामिल हैं। सरकार का मानना है कि इससे राज्य की ड्रग फ्री मुहिम को गति मिलेगी।


589 वन श्रमिकों को न्यूनतम वेतनमान

मंत्रिमंडल ने वन विभाग एवं वन विकास निगम में कार्यरत दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन देने का निर्णय लिया है।

  • कुल दैनिक श्रमिक: 893
  • पूर्व से लाभान्वित: 304
  • अब लाभान्वित होंगे: 589 श्रमिक
  • न्यूनतम वेतन: ₹18,000 प्रतिमाह

यह निर्णय मंत्रिमंडलीय उप-समिति की संस्तुति के आधार पर लिया गया।


ईएसआई चिकित्सा सेवा में बड़ा विस्तार

राज्य मंत्रिमंडल ने “उत्तराखण्ड कर्मचारी राज्य बीमा योजना, श्रम चिकित्सा सेवा नियमावली, 2026” को प्रख्यापित करने का निर्णय लिया है।

अब कुल 94 पद स्वीकृत किए जाएंगे, जिनमें—

  • 76 चिकित्सा अधिकारी
  • 11 सहायक निदेशक
  • 6 संयुक्त निदेशक
  • 1 अपर निदेशक

पहले ईएसआई ढांचे में केवल 1 सीएमओ और 13 चिकित्सा अधिकारियों के पद थे। इससे श्रमिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी।


सूक्ष्म खाद्य उद्यम योजना की अवधि बढ़ी

केंद्र सरकार द्वारा संचालित प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना की अवधि 31 मार्च 2026 तक बढ़ाई गई है।

इसी क्रम में राज्य की “मुख्यमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना” की अवधि भी वित्तीय वर्ष 2025-26 तक विस्तारित कर दी गई है। भविष्य में केंद्र स्तर पर अवधि बढ़ने पर राज्य में भी इसे स्वतः विस्तारित माना जाएगा।


कारागार सुधार अधिनियम में संशोधन

राज्य मंत्रिमंडल ने “उत्तराखंड कारागार और सुधारात्मक सेवाएं (संशोधन) अधिनियम, 2026” के प्रारूपण को मंजूरी दी है।

यह संशोधन माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप किया जा रहा है, जिसमें “आदतन अपराधी” की परिभाषा को राज्य कानूनों के अनुरूप करने की बात कही गई है। विधेयक आगामी विधानसभा सत्र में पुनः प्रस्तुत किया जाएगा।


बोनस संशोधन विधेयक 2020 वापस

कोविड-19 काल में लाया गया “बोनस संदाय (उत्तराखण्ड संशोधन) विधेयक, 2020” विधानसभा से वापस लेने का निर्णय लिया गया है। भारत सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा असहमति तथा वर्तमान में कोविड जैसी परिस्थितियाँ न होने के मद्देनज़र यह फैसला लिया गया।

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