देहरादून, 9 सितंबर। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों के अनुरूप राज्य संपत्ति विभाग ने सरकारी परिसंपत्तियों को आधुनिक, उपयोगी और पर्यावरण-अनुकूल स्वरूप देने की दिशा में कार्य तेज कर दिया है। सचिव राज्य संपत्ति एवं आवास डॉ. आर. राजेश कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठकों में रुद्रप्रयाग के रतूड़ा में प्रस्तावित राज्य अतिथि गृह और देहरादून के रेसकोर्स स्थित ओल्ड ऑफिसर्स कॉलोनी में 48 नए श्रेणी-3 आवासों की निर्माण कार्ययोजना की समीक्षा की गई।
रुद्रप्रयाग के रतूड़ा में ₹48.84 करोड़ की लागत से राज्य अतिथि गृह प्रस्तावित है। सचिव ने निर्देश दिए कि अतिथि गृह को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप आधुनिक सुविधाओं से विकसित किया जाए। इसके कॉन्फ्रेंस हॉल में मजबूत वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग व्यवस्था, बड़े आकार के फ्लैट टीवी और अन्य आवश्यक तकनीकी उपकरण उपलब्ध कराने को कहा गया है, ताकि परिसर प्रशासनिक बैठकों और संवाद के आधुनिक केंद्र के रूप में भी उपयोगी हो सके।
पर्यावरणीय मानकों का होगा पालन
रतूड़ा परियोजना में पर्यावरण संरक्षण पर भी विशेष जोर दिया गया है। कार्यदायी संस्था लोक निर्माण विभाग को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के मानकों के अनुरूप निर्माण स्थल की नदी से न्यूनतम 200 मीटर दूरी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। नियमानुसार प्रमाण-पत्र को अभिलेखों में शामिल करने को भी कहा गया है। अतिथि गृह के मुख्य प्रवेश द्वार और केंद्रीय भवन पर आकर्षक एवं बड़े आकार का लोगो लगाने के निर्देश भी दिए गए हैं।
वहीं देहरादून के रेसकोर्स स्थित ओल्ड ऑफिसर्स कॉलोनी में पुराने जर्जर भवनों को हटाकर ₹28.07 करोड़ की लागत से 48 नए श्रेणी-3 आवास बनाए जाने प्रस्तावित हैं। सचिव ने भवनों में ऐसी निर्माण सामग्री और फिनिशिंग का उपयोग करने के निर्देश दिए हैं, जिससे रखरखाव की लागत कम हो और बार-बार मरम्मत की आवश्यकता न पड़े।
ग्रीन बिल्डिंग और रेन वाटर हार्वेस्टिंग पर जोर
रेसकोर्स आवासीय परियोजना में ग्रीन बिल्डिंग मानकों का पालन अनिवार्य किया गया है। जल संरक्षण के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम भी विकसित किया जाएगा। प्रत्येक कॉलोनी के बाहर उसका नाम आकर्षक एवं स्पष्ट रूप में प्रदर्शित करने के लिए अलग-अलग डिजाइन और फॉर्मेट तैयार किए जाएंगे।
सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में आवासीय एवं राज्य संपत्ति से जुड़ी परियोजनाओं को गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्धता के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। पर्वतीय क्षेत्रों की भौगोलिक एवं सांस्कृतिक विशेषताओं को ध्यान में रखते हुए निर्माण में स्थानीय वास्तुशैली को प्राथमिकता दी जा रही है।
उन्होंने अधिकारियों को परियोजनाओं की नियमित समीक्षा करने और निर्धारित समयसीमा में कार्य पूरा कराने के निर्देश दिए, ताकि सरकारी परिसंपत्तियों का बेहतर उपयोग हो और इन योजनाओं का लाभ जल्द उपलब्ध कराया जा सके।