उत्तराखण्ड का आपदा प्रबंधन मॉडल देश के लिए अनुकरणीय: एनडीएमए

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देहरादून, 28 जुलाई। केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के निर्देशों के क्रम में उत्तराखण्ड में आपदा प्रबंधन की तैयारियों को और अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाने के उद्देश्य से मंगलवार को राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) एवं राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की संयुक्त टीम ने उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) का दौरा किया। इस दौरान राज्य की आपदा तैयारियों, विभिन्न परियोजनाओं, उपलब्ध संसाधनों तथा भविष्य की आवश्यकताओं की व्यापक समीक्षा की गई।

बैठक में एनडीएमए के संयुक्त सलाहकार कर्नल संजीव कुमार शाही ने उत्तराखण्ड के आपदा प्रबंधन मॉडल की सराहना करते हुए इसे देश के अन्य राज्यों के लिए अनुकरणीय बताया। उन्होंने कहा कि राज्य ने आपदा जोखिम न्यूनीकरण, पूर्व चेतावनी प्रणाली, संस्थागत समन्वय तथा तकनीक आधारित आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए हैं, जिन्हें राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनाया जा सकता है।

कर्नल शाही ने यूएसडीएमए द्वारा संचालित परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए राज्य में हाइड्रोमेट नेटवर्क के विस्तार को समयबद्ध एवं सटीक पूर्व चेतावनी प्रणाली विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने आधुनिक तकनीकों के अधिकतम उपयोग तथा रियल-टाइम डाटा आधारित निर्णय प्रणाली को और मजबूत बनाने पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियर झीलों से उत्पन्न खतरे लगातार बढ़ रहे हैं और भविष्य में ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट फ्लड (जीएलओएफ) बड़ी चुनौती बन सकता है। ऐसे में ग्लेशियर झीलों की सतत निगरानी, प्रभावी पूर्व चेतावनी प्रणाली तथा समय पर सुरक्षित निकासी व्यवस्था सुनिश्चित करना आवश्यक है। उन्होंने इस दिशा में एनडीएमए की ओर से हरसंभव तकनीकी एवं संस्थागत सहयोग का आश्वासन दिया।

बैठक में राज्य में उपलब्ध एनडीआरएफ एवं एसडीआरएफ की वर्तमान क्षमता और संसाधनों की भी समीक्षा की गई। कर्नल शाही ने उत्तराखण्ड की भौगोलिक परिस्थितियों और आपदा संवेदनशीलता को देखते हुए भविष्य की जरूरतों के अनुरूप दोनों बलों की क्षमता और संख्या बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि किसी भी आपदा की स्थिति में त्वरित और प्रभावी राहत एवं बचाव कार्य सुनिश्चित किए जा सकें।

बैठक के दौरान हीट वेव एक्शन प्लान, लैंडस्लाइड एवं फ्लैश फ्लड एक्शन प्लान, फॉरेस्ट फायर एक्शन प्लान, आकाशीय बिजली से बचाव, एनडीआरएफ एवं एसडीआरएफ के विस्तार, राज्य एवं जिला आपातकालीन परिचालन केंद्रों के आधुनिकीकरण, अग्निशमन विभाग को आधुनिक संसाधनों से लैस करने, उन्नत संचार प्रणाली, पूर्व चेतावनी तंत्र तथा विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई।

सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन ने यूएसडीएमए द्वारा आपदा जोखिम न्यूनीकरण, पूर्व चेतावनी प्रणाली, क्षमता विकास, सामुदायिक सहभागिता, हाइड्रोमेट नेटवर्क विस्तार, तकनीक आधारित निगरानी प्रणाली तथा राहत एवं बचाव व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए किए जा रहे नवाचारों और विभिन्न परियोजनाओं की जानकारी प्रस्तुत की।

बैठक में एनडीआरएफ के नोडल अधिकारी लल्लन कुमार, एसीईओ (प्रशासन) प्रकाश चंद्र, एसीईओ (क्रियान्वयन) एवं डीआईजी राजकुमार नेगी, अपर सचिव गृह तृप्ती भट्ट, एसडीआरएफ के कमांडेंट अर्पण यदुवंशी, जेसीईओ दिनेश कुमार पुनेठा, अग्निशमन विभाग के उपनिदेशक एस.के. राणा, एनडीआरएफ के अजय पंत, यूएलएमएमसी के निदेशक डॉ. शांतनु सरकार, डिप्टी एसपी एस.एस. नेगी सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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