लाल धारा कलेक्टिव: उत्तराखंड में सम्पूर्ण माहवारी स्वास्थ्य की ओर एक सार्थक पहल

Uttarakhand News

अल्मोड़ा, 16 जून। उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में ‘लाल धारा कलेक्टिव’ के तहत आयोजित तीन दिवसीय माहवारी जागरूकता अभियान ने ग्रामीण महिलाओं और किशोरियों के बीच माहवारी स्वास्थ्य, स्वच्छता तथा पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों को लेकर सकारात्मक संवाद को बढ़ावा दिया। 10 से 12 जून तक चले इस अभियान का उद्देश्य माहवारी से जुड़े वैज्ञानिक तथ्यों, स्वास्थ्य संबंधी पहलुओं और सामाजिक भ्रांतियों के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।

अभियान के अंतर्गत 10 जून को बाल्टा, 11 जून को खेतीगांव तथा 12 जून को कटरमल में कार्यशालाओं का आयोजन किया गया। इन कार्यक्रमों में महिलाओं और किशोरियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए माहवारी से जुड़े विषयों पर खुलकर चर्चा की और अपने अनुभव साझा किए।

इस पहल को सेवा (SEWA) उत्तराखंड, अश्वत्थ एजुकेशनल फाउंडेशन, डिजीधारा फाउंडेशन और वीमेन ऑफ उत्तराखंड (WoU) के संयुक्त प्रयास से आयोजित किया गया। विभिन्न संस्थाओं ने सामुदायिक भागीदारी सुनिश्चित करने, शैक्षिक सामग्री तैयार करने, स्थानीय समन्वय स्थापित करने तथा माहवारी और मानसिक स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

कार्यशालाओं में पारंपरिक व्याख्यान पद्धति के बजाय “वर्ल्ड कैफे” मॉडल अपनाया गया। इस पद्धति के तहत प्रतिभागियों को छोटे समूहों में विभाजित कर विभिन्न विषयगत स्टेशनों पर चर्चा और गतिविधियों के माध्यम से सीखने का अवसर दिया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं बल्कि समुदाय में संवाद और सहयोग की संस्कृति विकसित करना भी था।

कार्यशाला के दौरान जीवविज्ञान, स्वास्थ्य, स्वच्छता और सस्टेनेबिलिटी जैसे चार प्रमुख विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रतिभागियों को माहवारी के दौरान शरीर में होने वाले बदलावों, पोषण और मानसिक स्वास्थ्य, सुरक्षित स्वच्छता सुविधाओं तथा पर्यावरण-अनुकूल माहवारी उत्पादों की जानकारी दी गई। कपड़े के पैड, पीरियड पैंटी, मेंस्ट्रुअल कप और मेंस्ट्रुअल डिस्क जैसे टिकाऊ विकल्पों पर विशेष रूप से चर्चा हुई।

अभियान में शामिल महिलाओं और किशोरियों ने मानसिक स्वास्थ्य, मूड स्विंग्स, पोषण तथा वैकल्पिक माहवारी उत्पादों को लेकर विशेष रुचि दिखाई। कई प्रतिभागियों के लिए यह जानकारी नई थी, जिसे उन्होंने उत्साह और जिज्ञासा के साथ स्वीकार किया।

आयोजकों का कहना है कि ‘लाल धारा कलेक्टिव’ केवल एक जागरूकता अभियान नहीं, बल्कि ग्रामीण समुदायों में स्वास्थ्य, आत्मनिर्भरता और सामाजिक सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यह अभियान इस बात का उदाहरण है कि सही जानकारी और खुले संवाद के माध्यम से माहवारी से जुड़ी झिझक और भ्रांतियों को दूर किया जा सकता है तथा महिलाओं और किशोरियों को अपने स्वास्थ्य संबंधी निर्णयों के प्रति अधिक जागरूक और सशक्त बनाया जा सकता है।

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