मानसून जनित आपदाओं से निपटने की तैयारियों पर दो दिवसीय राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न

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देहरादून, 12 जून। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान (एनआईडीएम), गृह मंत्रालय, भारत सरकार एवं उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित मानसून पूर्व तैयारियों पर केंद्रित दो दिवसीय राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुक्रवार को सफलतापूर्वक समापन हो गया। कार्यक्रम में राज्य एवं जिला स्तर के अधिकारियों को मानसून जनित आपदाओं से निपटने के लिए आधुनिक तकनीकों, बेहतर समन्वय तंत्र और प्रभावी प्रतिक्रिया प्रणाली की जानकारी प्रदान की गई।

समापन सत्र को संबोधित करते हुए आपदा प्रबंधन विभाग की सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष विनय रूहेला ने कहा कि यह प्रशिक्षण उत्तराखण्ड में भूस्खलन, फ्लैश फ्लड, बादल फटना, शहरी बाढ़ तथा अन्य आपदाओं के जोखिम को कम करने में सहायक सिद्ध होगा। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण से अधिकारियों की आपदा प्रबंधन क्षमता और अधिक मजबूत होगी।

एनआईडीएम के प्रोफेसर नवनीत कुमार ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के कारण आपदाओं का स्वरूप लगातार जटिल होता जा रहा है। उन्होंने ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (जीएलओएफ) जैसी संभावित चुनौतियों का उल्लेख करते हुए वैज्ञानिक दृष्टिकोण, आधुनिक तकनीकों और संस्थागत तैयारियों को सुदृढ़ बनाने पर बल दिया। उन्होंने कार्बन ट्रेडिंग के क्षेत्र में उत्तराखण्ड की पहल की भी सराहना की।

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को साइको-सोशल सपोर्ट, राहत प्रबंधन, समुदाय आधारित आपदा प्रबंधन तथा विभिन्न आपदा परिदृश्यों पर आधारित टेबल-टॉप एक्सरसाइज के माध्यम से व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया गया। इस दौरान विभागीय समन्वय, संसाधन प्रबंधन एवं त्वरित निर्णय प्रक्रिया का अभ्यास कराया गया।

सचिव, आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने कहा कि कार्यक्रम में भूस्खलन जोखिम मूल्यांकन, आपदा प्रबंधन चक्र, जलवायु परिवर्तन जनित चुनौतियों तथा ड्रोन, जीआईएस, रिमोट सेंसिंग और डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसी उभरती तकनीकों के उपयोग पर विशेष चर्चा हुई। साथ ही पूर्व चेतावनी प्रणाली, अंतिम व्यक्ति तक समय पर सूचना पहुंचाने की रणनीतियों और इंसिडेंट रिस्पॉन्स सिस्टम (आईआरएस) में अधिकारियों की भूमिका पर भी विस्तार से मंथन किया गया।

अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (प्रशासन) प्रकाश चंद्र ने कहा कि प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रतिभागियों के लिए अत्यंत उपयोगी रहा। इससे मानसून पूर्व तैयारियों, जोखिम मूल्यांकन, स्वास्थ्य क्षेत्र की तैयारी, सामुदायिक सहभागिता, बहु-विभागीय समन्वय, क्षति एवं आवश्यकता आकलन तथा प्रभावी आपदा प्रतिक्रिया को लेकर व्यापक समझ विकसित हुई।

कार्यक्रम में राहत शिविर प्रबंधन एवं राहत सामग्री वितरण पर भी विशेष सत्र आयोजित किया गया। प्रतिभागियों को राहत शिविरों में आवास, भोजन, पेयजल, स्वच्छता और स्वास्थ्य सुविधाओं के प्रभावी संचालन के साथ-साथ आपदा प्रभावित परिवारों को वितरित की जाने वाली राहत सामग्री किट की संरचना और वितरण प्रक्रिया की जानकारी दी गई।

कार्यक्रम में डीआईजी होमगार्ड राजीव बलूनी, डीआईजी एसएसबी दुर्गा बहादुर सोनार, सीआरपीएफ के आनंद सिंह, आईआईआरएस के वैज्ञानिक डॉ. हरिशंकर, स्वास्थ्य विभाग के डॉ. बिमलेश जोशी, संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी मोहम्मद ओबैदुल्लाह अंसारी, एनआईडीएम के सहायक प्रोफेसर रोहित कुमार सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी एवं विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

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