नई दिल्ली। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नई दिल्ली में आयोजित “The Economic Times World Leaders Forum 2026” में प्रतिभाग करते हुए उत्तराखण्ड के विकास मॉडल, सुशासन, निवेश, रोजगार, पर्यटन, सीमांत क्षेत्रों के विकास, नवाचार और बुनियादी ढांचे से जुड़े विषयों पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन कायम करते हुए देश के अग्रणी राज्यों के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू कर राज्य ने सुशासन और समान अधिकारों की दिशा में एक नया मॉडल प्रस्तुत किया है। उनके अनुसार, इसके लागू होने के बाद महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के अधिकारों को मजबूती मिली है और समाज में सकारात्मक वातावरण बना है।
उन्होंने कहा कि SDG रैंकिंग में उत्तराखण्ड ने शीर्ष स्थान हासिल किया है। सरकार का लक्ष्य विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना और युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराना है।
पांच वर्षों में 34 हजार से अधिक सरकारी नियुक्तियां
रोजगार के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य गठन के बाद करीब दो दशकों में लगभग 16 हजार सरकारी नियुक्तियां हुई थीं, जबकि पिछले पांच वर्षों में ही 34 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी सेवाओं में नियुक्ति दी गई है। उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। पेपर लीक और नकल के मामलों में कठोर कार्रवाई करते हुए करीब 100 लोगों को जेल भेजा गया है।
शिक्षा व्यवस्था में सुधार पर जोर
मुख्यमंत्री ने शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे बदलावों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मदरसा बोर्ड को समाप्त कर उत्तराखण्ड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की व्यवस्था की गई है। सरकार का उद्देश्य प्रदेश के प्रत्येक बच्चे को समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। उन्होंने बताया कि मानकों के अनुरूप संचालित नहीं हो रहे 250 से अधिक मदरसों के विरुद्ध कार्रवाई की गई है।
इसके साथ ही सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने के अभियान का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सार्वजनिक संपत्तियों और सरकारी भूमि को सुरक्षित रखने के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है।
निवेश के लिए तैयार हुआ बेहतर वातावरण
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2023 में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के बाद उत्तराखण्ड की औद्योगिक पहचान में महत्वपूर्ण बदलाव आया है। समिट में 50 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया था। निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारने के लिए राज्य में 30 से अधिक नई नीतियां बनाई गई हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास एमओयू तक सीमित रहने के बजाय निवेश को वास्तविक परियोजनाओं में बदलना है, ताकि उद्योगों के साथ स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ें।
रेल, सड़क और हवाई कनेक्टिविटी को मिल रही गति
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड में सड़क, रेल और रोपवे कनेक्टिविटी को तेजी से मजबूत किया जा रहा है। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना करीब 125 किलोमीटर लंबी है और इसके पूरा होने से चारधाम यात्रा के साथ-साथ पर्वतीय क्षेत्रों की आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी।
उन्होंने दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे राष्ट्रीय राजधानी और देहरादून के बीच यात्रा समय में कमी आई है। देहरादून से देश के प्रमुख शहरों के लिए 50 से अधिक हवाई सेवाएं उपलब्ध होने की बात भी उन्होंने कही। वहीं पंतनगर में प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट को औद्योगिक और लॉजिस्टिक विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया।
पर्यटन को बनाया जा रहा बारह महीने का आर्थिक आधार
मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड की पर्यटन क्षमता को राज्य की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने चारधाम, कांवड़ यात्रा और आदि कैलाश में बढ़ती श्रद्धालु एवं पर्यटक संख्या का उल्लेख किया। उनके अनुसार चारधाम यात्रा के प्रथम चरण में ही 47 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे, जबकि कांवड़ यात्रा में करीब 4.80 करोड़ श्रद्धालुओं के पहुंचने का उल्लेख किया गया।
उन्होंने कहा कि सरकार पर्यटन को केवल एक मौसम तक सीमित नहीं रखना चाहती। विंटर टूरिज्म और साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देकर वर्षभर पर्यटन गतिविधियां संचालित करने पर जोर दिया जा रहा है। हर्षिल-मुखवा जैसे क्षेत्रों को शीतकालीन पर्यटन के नए केंद्रों के रूप में विकसित किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यटन के विस्तार से होमस्टे, ढाबे, होटल, परिवहन और स्थानीय उत्पादों से जुड़े रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं। सरकार का प्रयास है कि पहाड़ों के लोगों को अपने गांवों में ही रोजगार और स्वरोजगार के अवसर मिलें।
सीमांत गांवों को ‘प्रथम गांव’ के रूप में विकसित करने पर जोर
आदि कैलाश यात्रा की बढ़ती लोकप्रियता का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सीमांत क्षेत्रों में पर्यटन बढ़ने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है। इसी सोच के तहत सीमांत गांवों को ‘प्रथम गांव’ की अवधारणा के अनुरूप विकसित किया जा रहा है। इन क्षेत्रों में कनेक्टिविटी, आधारभूत सुविधाओं, पर्यटन और आजीविका के अवसर बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
AI और तकनीक में आगे बढ़ रहा उत्तराखण्ड
मुख्यमंत्री ने कहा कि भविष्य की अर्थव्यवस्था में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, विज्ञान, तकनीक और नवाचार की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उत्तराखण्ड में नवाचार नीति लागू की गई है और सरकार आधुनिक तकनीक के उपयोग को बढ़ावा दे रही है।
उन्होंने कहा कि उद्योगों के विकास के लिए बेहतर कानून-व्यवस्था और निर्बाध विद्युत आपूर्ति जैसी बुनियादी सुविधाओं को मजबूत किया जा रहा है, ताकि निवेशकों को अनुकूल वातावरण मिल सके।
जनवरी 2027 के हरिद्वार कुंभ का निमंत्रण
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड की विकास यात्रा केवल आर्थिक प्रगति तक सीमित नहीं है, बल्कि समावेशी और सतत विकास मॉडल तैयार करना सरकार का लक्ष्य है। युवाओं को रोजगार, महिलाओं को आत्मनिर्भरता, सीमांत क्षेत्रों को नई पहचान और आम नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर सरकार काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि राज्य में जनवरी 2027 में होने वाले हरिद्वार कुंभ की तैयारियां भी व्यापक स्तर पर की जा रही हैं। सरकार आवश्यक बुनियादी सुविधाओं को मजबूत कर रही है। मुख्यमंत्री ने देशवासियों और कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को आगामी कुंभ में शामिल होने का निमंत्रण भी दिया।