नई दिल्ली, 05 जुलाई। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सोमवार से छह दिवसीय विदेश यात्रा पर इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड रवाना होंगे। 6 से 11 जुलाई तक चलने वाली इस यात्रा को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की रणनीतिक स्थिति मजबूत करने, समुद्री सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता को नई गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यात्रा का सबसे प्रमुख पड़ाव न्यूजीलैंड रहेगा, जहां लगभग 40 वर्ष बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री का दौरा होने जा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी अपनी यात्रा के पहले चरण में 6 से 8 जुलाई तक इंडोनेशिया में रहेंगे। यह उनकी इंडोनेशिया की चौथी यात्रा होगी। इस दौरान वह इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो से द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा, विशेष रूप से मलक्का जलडमरूमध्य में सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा होगी। प्रधानमंत्री जकार्ता में भारतीय समुदाय को भी संबोधित करेंगे तथा योग्याकार्ता स्थित प्रसिद्ध प्रंबानन मंदिर में दर्शन-पूजन करेंगे।
यात्रा के दूसरे चरण में प्रधानमंत्री 8 से 10 जुलाई तक ऑस्ट्रेलिया में रहेंगे। मेलबर्न में वह ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज के साथ तीसरे भारत-ऑस्ट्रेलिया वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, रक्षा और रणनीतिक साझेदारी सहित विभिन्न द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा होगी। प्रधानमंत्री भारत-ऑस्ट्रेलिया सीईओ फोरम में भी हिस्सा लेंगे और भारतीय प्रवासी समुदाय को संबोधित करेंगे।
इसके बाद प्रधानमंत्री 10 से 11 जुलाई तक न्यूजीलैंड की यात्रा करेंगे। वर्ष 1986 में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की यात्रा के बाद यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री का पहला न्यूजीलैंड दौरा होगा। इससे पहले वर्ष 1968 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने न्यूजीलैंड का दौरा किया था। प्रधानमंत्री मोदी न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के साथ द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं पर विस्तृत चर्चा करेंगे।
इस यात्रा के दौरान भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को लागू करने की औपचारिक घोषणा भी हो सकती है। इस समझौते के लागू होने से भारतीय उत्पादों पर न्यूजीलैंड में आयात शुल्क समाप्त होने का मार्ग प्रशस्त होगा, जिससे कपड़ा, चमड़ा, फुटवियर, इंजीनियरिंग उत्पाद और फार्मास्यूटिकल्स के निर्यात को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। दोनों देशों के बीच निवेश, रोजगार और रणनीतिक सहयोग भी मजबूत होगा।
एफटीए के तहत न्यूजीलैंड भारत में निवेश बढ़ाएगा, जिससे रोजगार के नए अवसर सृजित होने की संभावना है। कृषि क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ेगा। न्यूजीलैंड कीवी, सेब और शहद उत्पादन में तकनीकी सहयोग देगा, जबकि भारत ने अपने डेयरी किसानों के हितों की रक्षा के लिए डेयरी उत्पादों को इस समझौते से बाहर रखा है।
वर्तमान में भारत और न्यूजीलैंड के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 2.4 अरब अमेरिकी डॉलर का है। भारत से विमान ईंधन, दवाएं, मोटर वाहन, इंजीनियरिंग उत्पाद, रेडीमेड वस्त्र और मशीनरी का निर्यात किया जाता है, जबकि न्यूजीलैंड से लकड़ी, लोहा-इस्पात, कच्ची ऊन, डेयरी उत्पाद, कोयला और स्क्रैप धातुओं का आयात होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि एफटीए लागू होने के बाद दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की रणनीतिक भूमिका भी और मजबूत होगी।